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राजपाल यादव चेक बाउंस केस: जानिए क्या होता है चेक बाउंस, कितनी हो सकती है सजा और क्या है कानून

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Posted On:Saturday, July 11, 2026


मामला वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई, जिसके कारण वह तय समय पर कर्ज की रकम वापस नहीं कर सके। समय के साथ ब्याज बढ़ता गया और विवाद आगे चलकर चेक बाउंस मामले में बदल गया।

अब सवाल उठता है कि आखिर चेक बाउंस क्या होता है और इसके लिए कानून में क्या सजा का प्रावधान है?

क्या होता है चेक बाउंस?

जब कोई व्यक्ति या कंपनी बैंक में भुगतान के लिए चेक जमा करती है, लेकिन किसी कारण से बैंक उस चेक का भुगतान नहीं कर पाता, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है। इसे बैंकिंग भाषा में Cheque Dishonour भी कहा जाता है।

चेक बाउंस होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे खाते में पर्याप्त पैसा न होना, हस्ताक्षर में अंतर, खाते का बंद होना, चेक की वैधता खत्म होना या बैंक से जुड़ी अन्य तकनीकी समस्या।

हालांकि, अगर किसी व्यक्ति ने किसी कर्ज, सामान खरीदने, सेवा लेने या किसी कानूनी देनदारी को चुकाने के लिए चेक जारी किया है और वह चेक भुगतान न होने के कारण वापस हो जाता है, तो यह कानूनी मामला बन सकता है।

चेक बाउंस पर कौन सा कानून लागू होता है?

भारत में चेक बाउंस से जुड़े मामलों पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस कानून का उद्देश्य चेक के जरिए होने वाले लेन-देन में विश्वास बनाए रखना है।

अगर कोई चेक बाउंस होता है, तो सबसे पहले चेक जारी करने वाले व्यक्ति को बैंक से सूचना मिलने के बाद कानूनी नोटिस भेजा जाता है। नोटिस मिलने के बाद उसे तय समय के अंदर भुगतान करने का मौका दिया जाता है। अगर भुगतान नहीं किया जाता, तो पीड़ित पक्ष अदालत में मामला दर्ज कर सकता है।

चेक बाउंस होने पर कितनी हो सकती है सजा?

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा अदालत आर्थिक जुर्माना भी लगा सकती है। कई मामलों में अदालत बकाया रकम का भुगतान करने का आदेश भी देती है।

सजा और जुर्माने का फैसला मामले की परिस्थितियों, आरोपी के व्यवहार और अदालत में पेश किए गए सबूतों के आधार पर किया जाता है।

क्या हर चेक बाउंस पर जेल होती है?

नहीं, हर चेक बाउंस मामले में जेल होना जरूरी नहीं है। अदालत मामले की गंभीरता, भुगतान की स्थिति और दोनों पक्षों की दलीलों को देखकर फैसला करती है। कई मामलों में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच समझौता भी हो जाता है।

चेक बाउंस कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों को धोखाधड़ी से बचाना और वित्तीय लेन-देन में भरोसा बनाए रखना है। राजपाल यादव का मामला इसी कानून के तहत सामने आया है, जिसमें अदालत ने लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अपना फैसला दिया है


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