ताजा खबर
ये प्रेम मोल लिया का सांग सावन आया है वायरल हुआ   ||    तब्बू के जन्मदिन पर मिला फैंस को खास तोहफा, किंग 100 से महारानी झांसी के दमदार अवतार में आईं नजर   ||    कनिका कपूर ने बताई दूसरी शादी टूटने की वजह, बोलीं मेरी जिंदगी में कोई तीसरा शख्स नहीं है   ||    सलमान खान के स्वैग से लेकर मृणाल ठाकुर की खूबसूरती तक, रमेश तौरानी की दिवाली पार्टी में सितारों का ल...   ||    सलमान खान का नया गाना तेरी सेक्सी ब्यूटी रिलीज, दो पेग और सुबह की फ्लाइट वाले ट्वीट ने फैंस को किया ...   ||    बोरीवली बस डिपो विवाद: बीएमसी, कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप   ||    अमेरिकी मिडटर्म चुनाव और ट्रंप की पार्टी को झटका: राजनीतिक समीकरणों में बदलाव   ||    Gold Price Outlook: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी, खरीदारों के लिए क्या हैं संकेत?   ||    मुकेश अंबानी बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति: झांग यिमिंग और अडानी को पीछे छोड़ा   ||    SBI रिसर्च: LTCG टैक्स हटाने से सरकारी राजस्व पर असर का विश्लेषण   ||   

निशिकांत दुबे के बाद उपराष्ट्रपति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग, अटॉर्नी जनरल से मांगी सहमति

Photo Source :

Posted On:Monday, April 21, 2025

देश की शीर्ष न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। दोनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को पत्र लिखकर अनुमति की अपील की।


भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ उठी मांग

सुप्रीम कोर्ट के वकील अनस तनवीर ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के हालिया बयान को सुप्रीम कोर्ट की गरिमा के खिलाफ बताते हुए अवमानना की कार्रवाई की मांग की है। उनके बाद वकील शिवकुमार त्रिपाठी ने भी इसी मामले में अटॉर्नी जनरल को अर्जी दी है। दोनों वकीलों का मानना है कि दुबे का बयान न्यायपालिका की साख और स्वायत्तता पर हमला है, जो अदालत की अवमानना के अंतर्गत आता है।


अब उपराष्ट्रपति भी विवादों के घेरे में

केरल के वकील सुभाष थीक्कदन ने देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ भी अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखा है। मामला तब गरमाया जब उपराष्ट्रपति ने वक्फ अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा:

"हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां सुप्रीम कोर्ट भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दे। संविधान में न्यायपालिका का अधिकार केवल अनुच्छेद 145(3) तक सीमित है। अनुच्छेद 142 अब लोकतंत्र के खिलाफ एक न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है।"


धनखड़ ने न्यायपालिका पर उठाए सवाल

उपराष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों का विश्वास न्याय प्रणाली से हट रहा है। उन्होंने एक घटना का हवाला भी दिया जिसमें एक न्यायमूर्ति के घर से नकदी मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने की बात कही। यह बयान कई कानूनी विशेषज्ञों और वकीलों को नागवार गुजरा, जिन्होंने इसे संवैधानिक मर्यादा के विरुद्ध बताया।


क्या है अनुच्छेद 142?

अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान का एक ऐसा विशेष प्रावधान है जो सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में "पूर्ण न्याय" सुनिश्चित करने के लिए आदेश या निर्णय पारित करने का अधिकार देता है। इसके तहत अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं, जैसे कि तलाक के मामलों में राहत, विवादित संपत्ति के निर्णय, और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर फैसला।


आगे क्या?

अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी इस पर क्या रुख अपनाते हैं। अगर वे सहमति देते हैं, तो यह देश में पहली बार होगा जब एक उपराष्ट्रपति और सत्ताधारी पार्टी के सांसद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू हो सकती है।

यह मामला न सिर्फ संवैधानिक अधिकारों की सीमाओं को उजागर करता है, बल्कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — के बीच सीमाओं और संतुलन को लेकर एक नई बहस भी छेड़ सकता है।


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.