ताजा खबर
गोकुळ दूध संघ अध्यक्ष चुनाव: सतेज पाटिल की मुंबई प्रेस कॉन्फ्रेंस और सरकार पर तीखा हमला   ||    विराट कोहली का 38वां जन्मदिन और विश्व क्रिकेट में उनका ऐतिहासिक कद   ||    सोनू सूद की टोपी बाजों की पंचायत ने जीता फैंस का दिल   ||    लडाकू के साथ फिर लौटेगी कार्तिक आर्यन और कबीर खान की जोड़ी   ||    गनमास्टर G9 में इमरान हाशमी का खूंखार अवतार आया सामने   ||    अजय देवगन की दृश्यम सक्सेस पार्टी में जुटे बॉलीवुड सितारे   ||    ये प्रेम मोल लिया का सांग सावन आया है वायरल हुआ   ||    तब्बू के जन्मदिन पर मिला फैंस को खास तोहफा, किंग 100 से महारानी झांसी के दमदार अवतार में आईं नजर   ||    कनिका कपूर ने बताई दूसरी शादी टूटने की वजह, बोलीं मेरी जिंदगी में कोई तीसरा शख्स नहीं है   ||    सलमान खान के स्वैग से लेकर मृणाल ठाकुर की खूबसूरती तक, रमेश तौरानी की दिवाली पार्टी में सितारों का ल...   ||   

हल्द्वानी हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखी, UAPA लगाने पर उठाए सवाल

Photo Source :

Posted On:Friday, July 31, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के हल्द्वानी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को मिली जमानत को बरकरार रखा है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब्दुल मलिक की जमानत जारी रहेगी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) लगाए जाने को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई भीड़ पुलिस थाने में आग लगा देती है, तो केवल इस आधार पर UAPA कैसे लागू किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) और UAPA के प्रावधान अलग-अलग विषय हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से सवाल किया कि किसी हिंसक घटना में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या पुलिस स्टेशन पर हमला होने मात्र से UAPA लगाने का आधार कैसे बन सकता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मामले में कड़े कानून लागू करने के लिए उसके तहत तय कानूनी शर्तों का पूरा होना जरूरी है।

उत्तराखंड सरकार ने अब्दुल मलिक की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली घटनाएं शामिल हैं। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत बरकरार रखने का फैसला दिया।

हल्द्वानी हिंसा मामला उस समय चर्चा में आया था, जब क्षेत्र में हिंसक घटनाएं हुई थीं और पुलिस प्रशासन को हालात नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी थी। जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था, जिसमें UAPA भी शामिल था।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि गंभीर अपराधों में UAPA जैसे विशेष कानूनों के इस्तेमाल के लिए किन मानकों को पूरा करना आवश्यक है। अदालत का फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.