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यूपी से ओडिशा तक ऐसे हुआ कायाकल्प, अब डबल इंजन की पावर से बंगाल की इकोनॉमी को मिलेगी रफ्तार!

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Posted On:Wednesday, May 6, 2026

2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिले 207 सीटों के ऐतिहासिक जनादेश ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक बदलाव की नींव भी रख दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब राज्य में 'डबल इंजन' गवर्नेंस का वह मॉडल लागू होगा, जिसने उत्तर प्रदेश, ओडिशा और असम जैसे राज्यों में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की दिशा बदल दी है। एलारा कैपिटल के विश्लेषकों के अनुसार, भारत का "कैपेक्स महाअभियान" अब पूरब की ओर मुड़ चुका है।

पिछड़े राज्यों से तुलना और सुधार की गुंजाइश आंकड़ों पर गौर करें तो पश्चिम बंगाल का पूंजीगत परिव्यय (GSDP का हिस्सा) वर्तमान में महज 2% है। इसके विपरीत, ओडिशा में यह 6.6%, उत्तर प्रदेश में 4.5% और मध्य प्रदेश में 4.3% है। बीजेपी शासित राज्यों में कैपेक्स में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी एक मिसाल है; जैसे असम में यह पिछली सरकारों के 0.4% से बढ़कर 21.5% के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया। यदि नई सरकार इस रिकॉर्ड का एक छोटा हिस्सा भी बंगाल में दोहराती है, तो बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।

आर्थिक गिरावट को थामने की चुनौती विरासत में मिली आर्थिक स्थिति नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। वित्त वर्ष 2018 से 2025 के बीच भारत की कुल जीडीपी में पश्चिम बंगाल का योगदान 28 बेसिस पॉइंट तक गिरा है, जबकि इसी अवधि में उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। 15 साल पुराने टीएमसी शासन के अंत के साथ ही, निवेशकों की नजरें अब उन नई नीतियों पर टिकी हैं जो बंगाल को फिर से औद्योगिक शक्ति बनाने और रोजगार सृजन में मदद कर सकें


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