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भारत के पड़ोस में जल्द बन सकता है नया देश: रखाइन के 17 में से 14 इलाके विद्रोहियों के कब्जे में, अब राजधानी को घेरा

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Posted On:Monday, June 8, 2026

भारत के पड़ोसी देश म्यांमार (Myanmar) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी भू-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। म्यांमार के विद्रोही गुट अराकान आर्मी (Arakan Army) ने रखाइन प्रांत को एक स्वतंत्र देश घोषित करने की तैयारी पूरी कर ली है और इसकी आधिकारिक घोषणा कभी भी हो सकती है।

अराकान आर्मी ने रखाइन को म्यांमार से अलग करने के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई को बेहद तेज कर दिया है। विद्रोही लड़ाकों ने रखाइन प्रांत की राजधानी सिटवे (Sittwe) को चारों तरफ से घेर लिया है। अराकान आर्मी ने इसे म्यांमार की सैन्य सरकार (जुंटा) के खिलाफ अपनी 'आखिरी बड़ी लड़ाई' घोषित किया है। यदि राजधानी सिटवे पर विद्रोहियों का पूरी तरह कब्जा हो जाता है, तो वे रखाइन को एक नया और स्वतंत्र देश घोषित कर देंगे।


17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा

स्थानीय म्यांमार अखबार द इरावाडी की रिपोर्ट के अनुसार, अराकान आर्मी की स्थिति इस समय बेहद मजबूत है:

  • रखाइन प्रांत के कुल 17 प्रशासनिक क्षेत्रों में से 14 इलाकों पर अराकान आर्मी ने पहले ही कब्जा कर लिया है।

  • अब केवल 3 इलाके बचे हैं, जिन्हें नियंत्रण में लेने के लिए भीषण जंग जारी है।

  • अराकान सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिटवे शहर के आसपास अपना डेरा डाल दिया है और उनका पूरा ध्यान अब राजधानी पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने पर है।


क्या है रखाइन राज्य और अराकान आर्मी का इतिहास?

रखाइन प्रांत भौगोलिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा के पास स्थित है। इस संकट की पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है:

  • 2009 में शुरुआत: रखाइन प्रांत में रहने वाली अराकान जाति (जो मुख्य रूप से बौद्ध धर्म को मानती है) ने म्यांमार सरकार से अधिक प्रशासनिक और स्वायत्त अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। इसी साल (2009) अराकान आर्मी का गठन एक सशस्त्र विद्रोही समूह के रूप में किया गया था।

  • 2016 का विद्रोह और रोहिंग्या संकट: साल 2016 के बाद इस क्षेत्र में हिंसा और विद्रोह ने भयानक रूप अख्तियार कर लिया। अराकान आर्मी के लड़ाकों और स्थानीय बहुसंख्यकों ने रखाइन में रहने वाले अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसक अभियान और नरसंहार की शुरुआत की।

  • रोहिंग्याओं का पलायन: अराकान आर्मी और म्यांमार सेना की संयुक्त प्रताड़ना और हिंसा के कारण लाखों रोहिंग्या समुदाय के लोगों को अपनी जान बचाकर बांग्लादेश, भारत और अन्य देशों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा (पलायन)।

  • तख्तापलट के बाद बदला समीकरण: इसी बीच म्यांमार में लोकतांत्रिक सरकार गिर गई और सेना (जुंटा) ने देश की सत्ता पर पूरी तरह कंट्रोल कर लिया। इसके बाद अराकान आर्मी ने म्यांमार की सेना के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और अब वे रखाइन को पूरी तरह से अलग देश बनाने के मुहाने पर खड़े हैं।

यदि रखाइन एक स्वतंत्र देश बनता है, तो इसका सीधा असर भारत और बांग्लादेश की सीमाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security) पर पड़ेगा।


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