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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: होर्मुज स्ट्रेट में भड़की चिंगारी, अमेरिका-ईरान समझौता टूटा

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Posted On:Thursday, July 9, 2026

मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है। महज तीन हफ्ते पहले 17 जून 2026 को जिस ऐतिहासिक समझौते ने दुनिया को अमन की उम्मीद दी थी, वह 7-8 जुलाई की दरमियानी रात को पूरी तरह नेस्तनाबूद हो गया। होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों पर हुए रहस्यमयी हमलों ने दोनों देशों के बीच ऐसी जंग छेड़ दी है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिका ने बिना वक्त गंवाए इस हमले का ठीकरा ईरान पर फोड़ा और जवाबी कार्रवाई करते हुए उसके 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के एयर डिफेंस और ड्रोन साइट्स को निशाना बनाया, जिससे खार्ग और केश्म द्वीप दहल उठे।

ईरान ने भी इस कार्रवाई का आक्रामक जवाब दिया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर 85 मिसाइलें और ड्रोन दागकर खाड़ी देशों में सायरन बजा दिए। इस पलटवार के बाद तुर्किये में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक शब्दों में एलान कर दिया कि 'ईरान के साथ समझौता अब खत्म हो चुका है।' अमेरिका ने न सिर्फ ईरान को दी गई तेल निर्यात की छूट वापस ले ली है, बल्कि ईरान की लाइफलाइन कहे जाने वाले 'खार्ग द्वीप' पर कब्जे की धमकी भी दे दी है।

खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहां से उसका 90 फीसदी कच्चा तेल निर्यात होता है। अगर अमेरिका इस पर नियंत्रण करता है, तो यह ईरान के लिए एक आर्थिक मौत जैसा होगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि खार्ग द्वीप पर आंच आई, तो एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा वापस नहीं जाएगा। फिलहाल, 9 जुलाई को अमेरिका द्वारा किए गए दूसरे दौर के हवाई हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में पूर्ण युद्ध का खतरा चरम पर पहुंच गया है।


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