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ऑपरेशन सिंदूर का चीनी सच बीजिंग ने कबूली पाकिस्तान को युद्ध के दौरान तकनीकी मदद देने की बात

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Posted On:Saturday, May 9, 2026

भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए भीषण सैन्य संघर्ष 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। चीन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि इस युद्ध के दौरान उसके सैन्य इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी सेना को जमीनी स्तर पर तकनीकी सहायता (Technical Assistance) प्रदान की थी। यह जानकारी चीन के सरकारी प्रसारक CCTV पर प्रसारित एक साक्षात्कार के जरिए सामने आई है।

युद्ध के मैदान में चीनी इंजीनियरों की मौजूदगी

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के अनुसार, 'एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना' (AVIC) के इंजीनियरों ने खुलासा किया कि वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद थे। इंजीनियर झांग हेंग ने बताया कि 50 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी और गूंजते एयर-रेड सायरन के बीच उनकी टीम पाकिस्तानी वायुसेना के J-10CE फाइटर जेट्स की मारक क्षमता सुनिश्चित कर रही थी। उन्होंने इसे चीन और पाकिस्तान के बीच "कंधे से कंधा मिलाकर" काम करने का प्रमाण बताया।

पाकिस्तान बना चीन की 'लाइव लैब'

यह स्वीकारोक्ति भारतीय सेना के उन दावों की पुष्टि करती है, जिनमें कहा गया था कि चीन अपने हथियारों का परीक्षण करने के लिए पाकिस्तान को एक 'लाइव लैब' की तरह इस्तेमाल कर रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने पहले ही आगाह किया था कि पाकिस्तान का 81% सैन्य हार्डवेयर चीनी मूल का है। चीन अब केवल हथियार बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक युद्ध स्थितियों में अपने रडार सिस्टम और फाइटर जेट्स की निगरानी भी कर रहा है।

रणनीतिक मायने और वैश्विक चिंता

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान चीन के हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का खुला सहयोग दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब चीन को अपना "प्राथमिक प्रतिद्वंद्वी" मानता है। यह खुलासा भविष्य में भारत की रक्षा तैयारियों और कूटनीतिक रुख को और कड़ा करने के लिए मजबूर करेगा।


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