ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन (Pentagon) के एक लीक हुए 'सीक्रेट ईमेल' ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स और पॉलिटिको की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अब नाटो (NATO) के भीतर 'अच्छे' और 'बुरे' देशों की छंटनी करने की योजना बना रहा है। इस सूची में सबसे ऊपर स्पेन का नाम है, जिसे गठबंधन से बाहर करने की मांग उठ रही है।
स्पेन पर क्यों भड़का अमेरिका?
ईरान युद्ध के दौरान स्पेन के रवैये ने वाशिंगटन को नाराज कर दिया है। ईमेल में स्पेन को बाहर करने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण बताए गए हैं:
- खुला विरोध: स्पेन ने न केवल युद्ध में अमेरिका का साथ देने से इनकार किया, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर ईरान के पक्ष में बयानबाजी भी की।
- एयरस्पेस बंदी: युद्ध के महत्वपूर्ण मोड़ पर स्पेन ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया, जिससे सैन्य ऑपरेशनों में भारी बाधा आई।
- अमेरिकी विरोधी रुख: पेंटागन का मानना है कि स्पेन अब नाटो की साझा सुरक्षा नीति के बजाय अमेरिका के हितों के खिलाफ काम कर रहा है।
ब्रिटेन और तुर्की भी रडार पर
लीक हुए ईमेल से यह भी संकेत मिले हैं कि अमेरिका केवल स्पेन तक ही सीमित नहीं रहेगा। वह नाटो के भीतर अपनी 'कमजोर कड़ियों' को दुरुस्त करने की तैयारी में है:
- तुर्की और ब्रिटेन: ईमेल के मुताबिक, इन देशों ने भी युद्ध के दौरान अमेरिका की मुश्किलें बढ़ाई हैं। प्रस्ताव है कि इन्हें नाटो के भीतर महत्वपूर्ण पदों और निर्णय लेने वाली समितियों से हटा दिया जाए।
- साम्राज्यवादी दावों का पुनर्मूल्यांकन: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका अब अर्जेंटीना के पास फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर अपने सबसे करीबी सहयोगी ब्रिटेन के दावे के समर्थन पर भी फिर से विचार कर सकता है।
क्या अमेरिका नाटो छोड़ देगा?
अब तक चर्चा थी कि डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव में अमेरिका खुद नाटो से बाहर निकल सकता है। लेकिन इस ईमेल ने तस्वीर साफ कर दी है—अमेरिका नाटो नहीं छोड़ेगा, बल्कि वह इसके भीतर अपने विरोधियों को बाहर का रास्ता दिखाएगा। ईमेल में कहीं भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने या नाटो से हटने का जिक्र नहीं है, जिसका मतलब है कि अमेरिका गठबंधन पर अपना नियंत्रण और सख्त करना चाहता है।