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BLO के साथ खड़ा हुआ सुप्रीम कोर्ट, राज्यों से कहा- SIR के लिए लगाइए अतिरिक्त स्टाफ

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Posted On:Thursday, December 4, 2025

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) को लेकर काम में तेजी आने के बीच, बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) पर काम का अत्यधिक दबाव (Pressure) आ रहा है। कई स्थानों से अधिकारियों के आत्महत्या करने तक की गंभीर खबरें सामने आई हैं। इन मामलों का संज्ञान लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट अब BLOs के साथ खड़ा हुआ है और राज्यों को निर्देश दिए हैं कि SIR के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए तैनात BLOs पर बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्यों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:

  1. काम के घंटे कम करना।

  2. अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करना।

  3. मानवीय आधार पर छूट के अनुरोधों पर विचार करना।

SC के मुख्य निर्देश

बीएलओ की आत्महत्याओं का मामला सामने आने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए कि SIR के लिए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बीएलओ की व्यक्तिगत छूट-अरजियों पर केस-टू-केस आधार पर विचार किया जाए।

टीवीके (याचिकाकर्ता) ने बीएलओ पर दर्ज FIR और जेल की धमकियों का मुद्दा उठाया था। इस पर अदालत ने कहा कि कोई भी BLO अपनी समस्या लेकर सीधे अदालत का रुख कर सकता है।

CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारों या राज्य चुनाव आयोगों की ओर से ECI (चुनाव आयोग) के अधीन SIR सहित वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रतिनियुक्त (deputized) किए गए कर्मचारी ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, अगर BLO को दिक्कत हो तो अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए जा सकते हैं।

BLOs पर दबाव कम करने के लिए तीन स्पष्ट निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने BLOs पर काम के दबाव को कम करने और उनकी कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए तीन स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

  1. अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती: SIR प्रक्रिया में लगे BLOs के काम के घंटे कम करने के लिए तुरंत अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाए।

  2. छूट पर व्यक्तिगत विचार: छूट (exemption) के अनुरोधों पर व्यक्तिगत आधार पर विचार किया जाए, खासकर जहाँ कोई स्वास्थ्य या निजी कारण बताता है। साथ ही, ऐसे मामलों में काम प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत दूसरे लोगों की नियुक्ति की जाए।

  3. सीधे कोर्ट से संपर्क: अगर अन्य प्रकार की राहत (जैसे काम के घंटे कम करना या छूट देना) नहीं दी जा रही है, तो संबंधित व्यक्ति सीधे कोर्ट से भी संपर्क कर सकते हैं।

यह फैसला BLOs के बढ़ते मानसिक और शारीरिक दबाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा मानवीय कदम है, यह सुनिश्चित करते हुए कि SIR प्रक्रिया बिना किसी बाधा के जारी रहे।


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