ताजा खबर
“दिल चुराने आ गया ‘दिल वाले चोर’: ‘पति पत्नी और वो 2’ का नया गाना हुआ रिलीज़”   ||    “भरोसे से बहस तक: कुनिका सदानंद की पोस्ट ने क्यों छेड़ दी नई राजनीतिक चर्चा”   ||    खलनायक रिटर्न्स में बल्लू अपने उसी अंदाज में नजर आएगा बोले संजय दत्त   ||    खलनायक का दर्द, जुनून और वापसी: सुभाष घई ने जगाई नई उम्मीद   ||    रिहाना की भारत में धमाकेदार वापसी, मुंबई एयरपोर्ट पर दिखा ग्लोबल स्टार का जलवा   ||    ईद 2027 पर सलमान खान का बड़ा दांव, SVC63 से बनेगा मेगा ब्लॉकबस्टर प्लान   ||    अनुपम खेर ने याद किया माइकल जैक्सन संग खास पल, बोले- “वो सिर्फ कलाकार नहीं, एक एहसास थे”   ||    ‘किंग’ का टीजर रिलीज: शाहरुख खान की दहाड़ इस क्रिसमस मचाएगी तहलका   ||    कच्चे तेल में उबाल $103 के पार पहुँचा ब्रेंट क्रूड, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ा अपडेट   ||    ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की 'रहस्यमयी' चुप्पी गंभीर चोटों और सर्जरी के बीच IRGC ने संभ...   ||   

Nepal News: बालेन सरकार के इस एक फैसले से क्यों परेशान हैं 50 लाख मधेशी?

Photo Source :

Posted On:Tuesday, April 21, 2026

नेपाल सरकार के एक ताजा प्रशासनिक आदेश ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित मधेश प्रांत में हलचल मचा दी है। सरकार ने घोषणा की है कि भारत से 100 रुपये (नेपाली मुद्रा) से अधिक मूल्य का सामान लाने वाले किसी भी नेपाली नागरिक को अब सीमा शुल्क (Customs Duty) देना होगा। नेपाल सीमा सुरक्षा इकाई द्वारा इस नियम को सख्ती से लागू किए जाने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव और चिंता का माहौल है।
महंगाई की दोहरी मार: भारत vs नेपाल
मधेश क्षेत्र के करीब 50 लाख लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते हैं। नेपाल और भारत के बीच रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर है:

वस्तु (प्रति इकाई) भारत में कीमत (₹) नेपाल में कीमत (रु.) अंतर
सरसों तेल (1L) ~150 ~400 (नेपाली ₹600) 4 गुना तक
चीनी (1kg) ~40-45 ~107 दोगुने से अधिक
मधेश के लोग अक्सर भारत से सस्ता राशन लाकर स्थानीय स्तर पर बेचते थे, जिससे इस प्रांत में महंगाई अन्य प्रांतों की तुलना में कम रहती थी। अब 100 रुपये की बेहद कम सीमा (Limit) तय होने से एक लीटर तेल लाना भी 'तस्करी' या 'कर चोरी' के दायरे में गया है।
सरकार का तर्क: राजस्व और स्थानीय व्यापार
नेपाल सरकार ने इस कड़े फैसले के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं:
  1. राजस्व में वृद्धि: स्थानीय प्रशासन के अनुसार, केवल मार्च महीने में ही तय लक्ष्य का 85% राजस्व वसूला जा चुका है।
  2. स्थानीय व्यापारियों का संरक्षण: सरकार का मानना है कि सीमा पार से आने वाले सस्ते सामान के कारण नेपाल के अंदरूनी व्यापारियों को नुकसान हो रहा था।
'रोटी-बेटी' के रिश्तों पर असर
इस आदेश का सबसे भावनात्मक और सामाजिक असर उन 3 लाख से अधिक परिवारों पर पड़ रहा है जिनके वैवाहिक संबंध सीमा के दोनों पार हैं।
  • तोहफों पर पाबंदी: नेपाल और भारत के बीच शादियों और त्योहारों पर उपहारों के आदान-प्रदान की पुरानी परंपरा है।
  • व्यावहारिक कठिनाई: अब यदि कोई बेटी अपने मायके (भारत) से कुछ कपड़े या मिठाई लेकर नेपाल लौटती है, तो उसे सीमा पर लंबी कतारों और भारी टैक्स का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नियम में ढील नहीं दी गई, तो मधेश प्रांत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम आदमी की थाली और उसकी जेब पर चोट है।


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.