मध्यप्रदेश में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) को लागू करने की दिशा में डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सामाजिक और विधिक ढांचे को एकरूपता देने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन को मंजूरी दे दी है। यह समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील विषयों पर प्रचलित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन कर एक साझा विधिक मसौदा तैयार करेगी।
जस्टिस रंजना देसाई संभालेंगी कमान
समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रसाद देसाई को सौंपी गई है, जिनके पास उत्तराखंड में UCC का सफल मॉडल तैयार करने का अनुभव है। समिति में सेवानिवृत्त IAS शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह को शामिल किया गया है। अजय कटेसरिया इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
उत्तराखंड और गुजरात मॉडल का होगा विश्लेषण
मध्यप्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के बीच समानता और न्याय-संगतता सुनिश्चित करना है। समिति न केवल मध्यप्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधताओं का अध्ययन करेगी, बल्कि उत्तराखंड और गुजरात में अपनाई गई प्रक्रियाओं का भी गहन परीक्षण करेगी। समिति का फोकस विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर होगा:
- विवाह और विच्छेद: सभी समुदायों के लिए एकसमान नियम।
- भरण-पोषण और गोद लेना: बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा।
- लिव-इन रिलेशनशिप: इस व्यवस्था को कानून के दायरे में लाना।
विधिक स्पष्टता की ओर कदम
वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण विधिक जटिलताएं पैदा होती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि एक समरूप विधिक संरचना विकसित होने से शासन और न्याय व्यवस्था में स्पष्टता आएगी। समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले विभिन्न हितधारकों और समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव भी ले सकती है, ताकि एक व्यावहारिक और संतुलित सिफारिश पेश की जा सके।