स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च अब तक के उच्चतम स्तर 2,887 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। यह वैश्विक जीडीपी का 2.5% है, जो 2009 के बाद सबसे अधिक हिस्सेदारी है। चिंताजनक बात यह है कि यह लगातार 11वां साल है जब रक्षा बजट में वृद्धि दर्ज की गई है।
वैश्विक खर्च में अमेरिका, चीन और रूस की हिस्सेदारी सबसे प्रमुख रही है। इन तीनों देशों ने मिलकर 1,480 अरब डॉलर खर्च किए, जो दुनिया के कुल रक्षा बजट का आधे से भी अधिक (51%) है। हालांकि, अमेरिका के खर्च में 7.5% की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण यूक्रेन को मिलने वाली नई सैन्य सहायता में कमी रही। इसके बावजूद, अमेरिका का परमाणु और पारंपरिक हथियारों पर निवेश जारी है और अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 तक उसका बजट 1 ट्रिलियन डॉलर के पार निकल जाएगा।
यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रक्षा खर्च में 14% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रूस ने अपनी जीडीपी का 7.5% (190 अरब डॉलर) और युद्ध झेल रहे यूक्रेन ने अपनी जीडीपी का रिकॉर्ड 40% हिस्सा सेना पर खर्च किया। एशिया में भारत, चीन, जापान और पाकिस्तान ने भी अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। SIPRI की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि दुनिया शांति के बजाय सैन्य मजबूती की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रही है।